आजादोत्सव

ये आजादी हमें यू ही नहीं मिली थीये तो उन लाखो शहीदों की देन थीजिन्हें न मर मिटने का खौफ थान ही उन हुक्मपरस्तों का डरवह बेइंतहा मोहब्बत थीइस वतन की मिट्टी सेन रोक सकी उन्हें कोई गोलीन ही जंजीरों की बेड़िया धर्म, पंथ, जात अलग थेकोई हिन्दू था तो कोई मुस्लिमजहा गंगा की सौगंधContinue reading “आजादोत्सव”

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