आजादोत्सव

ये आजादी हमें यू ही नहीं मिली थीये तो उन लाखो शहीदों की देन थीजिन्हें न मर मिटने का खौफ थान ही उन हुक्मपरस्तों का डरवह बेइंतहा मोहब्बत थीइस वतन की मिट्टी सेन रोक सकी उन्हें कोई गोलीन ही जंजीरों की बेड़िया धर्म, पंथ, जात अलग थेकोई हिन्दू था तो कोई मुस्लिमजहा गंगा की सौगंधContinue reading “आजादोत्सव”

क्या करे क्या ना करे

अक्सर ये जिंदगी ना जाने क्या दिखाती हैं कभी एक खिलखिलाती नदी सी हसी ओठों पे आ जाती हैं और कभी गहरे खामोश पानी सा एहसास दिलाती हैं चन्द लम्हों के इस इंद्रधनू में सारे रंगों को देखने की आशा जताती हैं क्या करे क्या ना करे हमे ये महबूबा बड़ा तड़पती हैं . …..Continue reading “क्या करे क्या ना करे”

उम्मीद थी कि तुमसे मिलूँगा…

उम्मीद थी कि तुमसे मिलूँगा लेकिन क्या करू अब आस रही नहीं जो पहले थी जो उम्मीद थी कई सालों से अब वो ढलान से गुजर रही हैं क्या पता किसी पत्थर के ठोखर से यह आप ना खो दे और टूट जाए उम्मीद थी की तुमसे मिलूँगा. अक्सर देखता हूँ टूटते- बनते रिश्तों कोContinue reading “उम्मीद थी कि तुमसे मिलूँगा…”

एक आस

एक आस लगी है रोशनी की थोड़ी रोशनी तो दिख जाए जो बादल छाए घने हैं कई एक कोने से आसमान के धुप की छोटीसी किरन किसी दिवार पर पड़े कई आकार बनाकर अपने हाथोंसे बच्चे अपना मन बहलाए नौजवान अपनी राह बनाए और बुजुर्ग फिरसे जीना सीखे एक आस लगी हैं रोशनी की थोड़ीContinue reading “एक आस”

गुस्सा क्या हैं

ना जाने किस किस उम्मीद से बंधे हैं हम जब उम्मीद टूटे तब भी गुस्सा जब उम्मीदे बढे तब भी गुस्सा ये गुस्सा हैं कि मानाने को तैयार नहीं हमे और खुद को जलाता रहता हैं यही नहीं जब सवाल हो कही सारे ये गुस्सा हे की उलझनो से डर कर खुद ही उलझता जाताContinue reading “गुस्सा क्या हैं”

स्वतंत्र भारत

इस साल भारत अपनी स्वतंत्रता की चौहत्तरवी सालगिराह मना रहा हैं। अपने इन वर्षों में इस देश ने कई सारे बदलाव देखे, उतार- चढाव से भरे इन वर्षों में जहाँ सफलता देखी वही कई बार निराशा भी हाथ आयी। अखंड सालो की परंपराऐ और नये दौर को एक साथ चलते हुए भी देख रहे हैं।Continue reading “स्वतंत्र भारत”

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