तारुण्यातील विसावा

” मला हि कधी कधी तरुण व्हावं असं वाटत, उडाव, हिंडावं कुठं तरी दूर जाऊन फक्त स्वतःच सुरकुत्या नसलेला तेजस्वी असा चेहरा नीहाळावा, सोडावं सगळं आणि व्हावं मुक्तछंद पक्षी, जो स्वतःच्या पंखांवर प्रेम करतो, कारण ती पंखच असतात जी त्याला त्याच अस्तित्व देतात. ‘तो’ होण्याचं सौभाग्य प्रदान करतात. तसंच माणसाला तारुण्य देत असत.” हा विचारContinue reading “तारुण्यातील विसावा”

आजादोत्सव

ये आजादी हमें यू ही नहीं मिली थीये तो उन लाखो शहीदों की देन थीजिन्हें न मर मिटने का खौफ थान ही उन हुक्मपरस्तों का डरवह बेइंतहा मोहब्बत थीइस वतन की मिट्टी सेन रोक सकी उन्हें कोई गोलीन ही जंजीरों की बेड़िया धर्म, पंथ, जात अलग थेकोई हिन्दू था तो कोई मुस्लिमजहा गंगा की सौगंधContinue reading “आजादोत्सव”

When you feel ‘not Trustworthy’

Before this corona pandemic, the situation of people was as usual normal, but now, having passed this second wave, life takes a speed to come back on regular track. Some people have been on working pre lockdown. So, they don’t feel awful for being jobless, with the new concept; called work from home, they haveContinue reading “When you feel ‘not Trustworthy’”

क्या करे क्या ना करे

अक्सर ये जिंदगी ना जाने क्या दिखाती हैं कभी एक खिलखिलाती नदी सी हसी ओठों पे आ जाती हैं और कभी गहरे खामोश पानी सा एहसास दिलाती हैं चन्द लम्हों के इस इंद्रधनू में सारे रंगों को देखने की आशा जताती हैं क्या करे क्या ना करे हमे ये महबूबा बड़ा तड़पती हैं . …..Continue reading “क्या करे क्या ना करे”

उम्मीद थी कि तुमसे मिलूँगा…

उम्मीद थी कि तुमसे मिलूँगा लेकिन क्या करू अब आस रही नहीं जो पहले थी जो उम्मीद थी कई सालों से अब वो ढलान से गुजर रही हैं क्या पता किसी पत्थर के ठोखर से यह आप ना खो दे और टूट जाए उम्मीद थी की तुमसे मिलूँगा. अक्सर देखता हूँ टूटते- बनते रिश्तों कोContinue reading “उम्मीद थी कि तुमसे मिलूँगा…”

Ram…Was, Is and Will be (Segment-1)

In this Bengal election, we must have heard the slogan, ‘Jai Shree Ram. Which described the importance of Ram, even today, and the most notable thing that_ how we could forget the politics over Ram mandir for almost two decades. On the occasion of Netaji Subhas Chandra Bose birth anniversary, when Mamta Banerjee stood toContinue reading “Ram…Was, Is and Will be (Segment-1)”

एक आस

एक आस लगी है रोशनी की थोड़ी रोशनी तो दिख जाए जो बादल छाए घने हैं कई एक कोने से आसमान के धुप की छोटीसी किरन किसी दिवार पर पड़े कई आकार बनाकर अपने हाथोंसे बच्चे अपना मन बहलाए नौजवान अपनी राह बनाए और बुजुर्ग फिरसे जीना सीखे एक आस लगी हैं रोशनी की थोड़ीContinue reading “एक आस”

गुस्सा क्या हैं

ना जाने किस किस उम्मीद से बंधे हैं हम जब उम्मीद टूटे तब भी गुस्सा जब उम्मीदे बढे तब भी गुस्सा ये गुस्सा हैं कि मानाने को तैयार नहीं हमे और खुद को जलाता रहता हैं यही नहीं जब सवाल हो कही सारे ये गुस्सा हे की उलझनो से डर कर खुद ही उलझता जाताContinue reading “गुस्सा क्या हैं”

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